दूध, तेल और चिकेन खरीदना हुआ महंगा

Milk-oil-and-chicken-prices-riseनई दिल्ली। दाल और प्याज के बाद अब दूध, तेल और चिकन की महगांई से लोग बेहाल हो रहे हैं। पिछले एक महीने में दूध, तेल और चिकेन की कीमत में दस फीसदी तक की वृद्धि हुई है। सब्जियों में टमाटर और भिंडी के दाम में पचास फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है। इस बारे में व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीनों पहले की बेमौसम बरसात के बाद अब अगर मॉनसून कमजोर रहता है तो महंगाई और बढ़ेगी।
बाजार में दाल सहित अन्य सामग्री की कीमतों में वृद्धि से आम जनता पहले से ही त्रस्त है। रोजमर्रा के उपयोग में आनेवाले सरसों तेल की कीमतें बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ गयी है। व्यापारियों का मानना है कि सरसों की फसल को नुकसान पहुंचने के कारण इसकी कीमतों में तेजी आयी है। खराब मौसम की वजह से तेलहन की फसल को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल कीमतों में गिरावट की संभावना नहीं है।
इसके अलावा चिकेन का उत्पादन भी पर्याप्त नहीं हुआ है। पिछले दिनों चली लू के कारण करीब ढाई करोड़ मुर्गियों की मौत हो गई है। इसके कारण चिकेन के भाव में भी 25 से 30 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। चिकेन कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक अगर आनेवाले दिनों में गर्मी का प्रकोप जारी रहता है तो चिकेन के दाम में और भी बढ़ोतरी हो सकती है।
गौरतलब है कि मॉनसून तय समय से काफी देर से आया है, यही नहीं चक्रवात की चपेट में आने से अब भी मॉनसून को पूरी गति नहीं मिल पाई है। कमजोर मॉनसून की आशंकाओं के चलते बाजार में निराशाजनक ट्रेंड देखने को मिल रहा है। अब तक कमोबेश महंगाई को थामे रखने में सफल रहने वाली मोदी सरकार ने भविष्य की आशंकाओं के चलते पहले ही दालों के आयात का फैसला कर लिया है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक उत्तर भारत समेत पूरे देश में मॉनसून के 12 फीसदी कम रहने की संभावना है, ऐसे में अभी लोगों को महंगाई और रूलाने वाली है।

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