एफ एस एस ए आइ हुआ सुस्त

07_06_2015-08maggi01मैगी को लेकर काफी चुस्ती दिखाने वाला भारतीय खाद्य सुरक्षा व गुणवत्ता प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) अब सुस्त होने लगा है। मैगी के बाद बगैर सरकारी मंजूरी के अन्य खाद्य उत्पाद बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ राष्ट्रीय अभियान चलाने वाली यह एजेंसी हफ्ते भर में ही हांफने लगी है। देश भर में घूम घूम कर डिब्बाबंद उत्पादों का सैंपल तो इकठ्ठा कर लिया गया लेकिन अब प्रयोगशालाओं और अधिकारियों की कमी की वजह से इनकी जांच पूरी नहीं हो पा रही है। इससे देश के लाखों किराना दुकानदारों के सामने अजीब सी स्थिति पैदा हो गई है कि वह इन उत्पादों को बेचें या नहीं। छोटे दुकानदारों के हजारों करोड़ रुपये इस वजह से फंस गए हैं।

एफएसएसएआइ की सुस्ती का आलम यह है कि मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले इंडिया को अभी तक प्राधिकरण की तरफ से वह रिपोर्ट नहीं भेजी गई है जिसमें मिलावट होने की बात सत्यापित होती है। नेस्ले इंडिया के कॉरपोरेट कम्यूनिकेशंस के प्रमुख हिमांशु मलिक ने मंगलवार को बताया कि उनकी कंपनी को अभी तक एफएसएसएआइ की तरफ से कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। कंपनी को किसी अन्य राज्य सरकार ने भी रिपोर्ट नहीं भेजी है, जिसके आधार पर उन्होंने मैगी की बिक्री पर पाबंदी लगाई है। वैसे कंपनी ने न सिर्फ मैगी का उत्पादन भारत में बंद कर दिया है बल्कि इसे दुकानों से बाहर निकालना भी शुरू कर दिया है। कंपनी बाजार से 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की मैगी वापस ले चुकी है। उधर, देश में खुदरा दुकानों के संगठन सीएआइटी का कहना है कि मैगी विवाद के बाद देश में दर्जनों अन्य नूडल्स ब्रांड की बिक्री भी पूरी तरह से ठप्प हो चुकी है। इन ब्रांडों को उठाने में दुकानदारों ने अरबों रुपये लगाए हुए हैं लेकिन इनका पैसा कौन वापस करेगा इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

fscनेस्ले इंडिया ने मैगी को वापस लेने के बाद दुकानदारों को हुई हानि की भरपाई अभी तक नहीं की है। सीएआइटी ने सरकार से आग्रह किया है कि ऐसी स्थिति में विक्रेताओं और खुदरा दुकानदारों को होने वाली आर्थिक हानि की भरपाई की नीति तैयार करे। 1मैगी विवाद के बाद एफएसएसएआइ ने 500 उत्पादों को चिन्हित किया है जिनमें या तो मिलावट होने के संदेह या जिन्हें सरकारी एजेंसी की स्वीकृति के बगैर बेचा जा रहा है। इस बारे में राज्यों को सूचना भेजी गई है कि वे अपने स्तर पर भी जांच करें। लेकिन कई राज्य सरकारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास इतनी बड़ी संख्या में उत्पादों में मिलावट की जांच करने का ढांचा नहीं है। यही समस्या एफएसएसएआइ के पास भी है। वह अधिकारियों व प्रयोगशालाओं की कमी से जूझ रही है।

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