भारत के पास पूंजीपतियों की बड़ी फौज

नई दिल्ली : गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की संख्या कम हुई या नहीं यह विवाद का विषय हो सकता है, लेकिन देश में अरबपतियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है इसमें कोई शक नहीं है। हकीकत यह है कि भारत अरबपतियों की संख्या के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर है। पिछले वर्ष तक भारत में बेहद अमीर यानी ऐसे व्यक्ति जिनकी निजी परिसंपत्ति 10 करोड़ डॉलर (मौजूदा स्थिति में लगभग 630 करोड़ रुपये) है उनकी संख्या 928 थी। भारत से ज्यादा अमेरिका में 5201 ऐसे दौलतमंद हैं। उसके बाद चीन में 1037, ब्रिटेन में 1019 अरबपति हैं। इस बात का खुलासा अमेरिका की बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप (बीसीजी) की ताजा रिपोर्ट से हुआ है।

भारत के पास पूंजीपतियों की बड़ी फौजदुनिया भर में निजी संपत्तियों की स्थिति पर यह समूह हर वर्ष रिपोर्ट जारी करता है।1भारत में दौलतमंदों की संख्या भले ही तेजी से बढ़ रही हो, लेकिन आने वाले तीन से चार वर्षो में इस वृद्धि की रफ्तार सुस्त हो सकती है। इसके मुताबिक वर्ष 2013-2014 में भारत में निजी परिसंपत्तियों में 24.8 फीसद का इजाफा हुआ है, लेकिन वर्ष 2014-2019 के बीच यह रफ्तार घटकर 21.5 फीसद रह सकती है। वर्ष 2009 से 2013 के बीच पूंजीपतियों की संख्या में 12.1 फीसद की दर से इजाफा हुआ था। बीसीजी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में धनाढ्यों की संख्या में इस बढ़ोतरी के लिए यहां के शेयर बाजार का प्रदर्शन प्रमुख तौर पर जिम्मेदार है। चीन और भारत में शेयर बाजार ने पिछले कुछ वर्षो में भारी तेजी दर्ज की है, जिससे निजी परिसंपत्तियों में इजाफा हुआ है। चीन के इक्विटी बाजार में 38 फीसद और भारत के इक्विटी बाजार में 23 फीसद की तेजी आई है। आगे निजी परिसंपत्तियों में तेज वृद्धि नहीं होने के अनुमान से साफ है कि बीसीजी यह मानता है भारतीय शेयर बाजार में वर्ष 2019 तक अब उतनी तेजी का माहौल नहीं रहेगा। लेकिन, समूह यह भी कहता है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की ताकत बढ़ेगी। वर्ष 2015 के बाद से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले सालाना तौर पर मजबूत होगा और वर्ष 2014 से तुलना करें तो वर्ष 2019 तक यह नौ फीसद तक मजबूत हो सकता है।

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