खाद्य पदार्थों की महंगाई ने बढ़ाई परेशानी –

नई दिल्ली। देश में कम उत्पादन के कारण दलहन की कीमतों में हो रही भारी बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने 500 टन अरहर की दाल का आयात करने का फैसला किया है। इसके लिए निविदा जारी की जा चुकी है।इससे पहले, सरकार दाल की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए वर्ष 2015-16 के लिए दलहन की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी का एलान किया था। इसके अनुसार अरहर की एमएसपी में 75 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।मूंग, उड़द और अरहर के लिए सरकार ने 200 रुपए प्रति क्विंटल बोनस भी देने की घोषणा की। इस तरह अरहर की एमएसपी अब 4,350 की जगह 4,625 रुपए प्रति क्विंटल हो गई थी।

23_06_2015-arhardaalदाल की बढ़ती कीमत रोकने को राजस्थान सरकार ने लगाई स्टॉक लिमिट –

दालों की कालाबाजारी रोकने और कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने दलहन की स्टॉक लिमिट तय कर दी है। मिल मालिक से लेकर थोक और खुदरा कारोबारी अब तय समय तक ही दालों का स्टॉक कर सकेंगे। दालों के खुदरा कारोबारी अब एक वक्त में 25 क्विंटल और थोक कारोबारी 2500 क्विंटल से ज्यादा दालों का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इसके कारण वायदा बाजार में चने की कीमतों में 3 फीसद कमी आई और इसके दाम 4050 रुपए प्रति क्विंटल से कम हुए हैं।

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने सोमवार को एसेंशियल कमोडिटी एक्ट के तहत इसकी अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना 15 दिन बाद लागू होगी और 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। बाजार में दालों की सप्लाई कमजोर होने से इनके थोक भाव 00 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। खुदरा बाजार में तो महंगाई का हाल यह है कि दाल के दाम125 रुपए किलो से भी ज्यादा है।

सरकार के इस फैसले से दालों के कालाबाजारियों पर रोक लगेगा दालों का स्टॉक बड़ी मात्रा में बाजार में आने लगेगा। स्टॉक लिमिट लागू करने के लिए लाइसेंस एंड कंट्रोल ऑर्डर भी रिवाइव किया गया। पुराने लाइसेंसिंग एंड कंट्रोल ऑर्डर की अवधि सितंबर 2013 में ही समाप्त हो चुकी थी। इससे पहले 2012 में भी सरकार ने दालों के स्टॉक पर लिमिट लगाया था।

खाद्य पदार्थों की महंगाई ने बढ़ाई आरबीआई की परेशानी

देश में बहुत से खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ी हुई है। इस साल अच्छे मॉनसून की संभावना और हाल के दिनों में हुई अच्छी बारिश के बावजूद कीमतें कम होने का नाम नहीं ले रही। एक तरफ इस महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ कर रख दी है तो दूसरी तरफ थोक बिक्रेताओं के लिए यह अप्रत्याशित वरदान है। इसिलिए केंद्रीय बैंक और सरकार के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर रघुराम राजन अर्थव्यवस्था में वृद्धि को रफ्तार देने के लिए इस साल ब्याज दरों में तीन बार कटौती कर चुके हैं। लेकिन उन्होंने चेताया है कि अगर कमजोर बारिश से कीमतों में बढ़ोतरी होती है और महंगाई उनके लक्ष्य से ऊपर जाती है तो वह दरों में कटौती नहीं करेंगे। इसके चलते मुंबई में बॉन्ड और स्टॉक ट्रेडर लगातार मौसम के पूर्वानुमानों पर नजर जमाए हुए हैं। लेकिन इस वित्तीय राजधानी से पूर्व में 330 किलोमीटर दूर स्थित औरंगाबाद के भीड़भाड़ वाले बाजार में एक थोक विक्रेता शेख शरीफ को मॉनसून पर नजर रखने की कोई जरूरत नहीं है। वह कहते हैं कि भले ही बारिश कैसी रहे, कीमतें ऊंची रहेंगी। उन्होंने कहा कि इस साल की शुरुआत में बेमौसम बारिश और उसके बाद लू से फसलों को नुकसान पहुंचा है और किसान इस कमी की तत्काल भरपाई की स्थिति में नहीं होंगे। उन्होंने कहा, ‘कम आपूर्ति के कारण अच्छे मॉनसून के बावजूद सब्जियों की कीमतें बढ़ेंगी।’ शरीफ ने कहा, ‘अगर मॉनसून खराब रहा तो कीमतों और ज्यादा उछाल आएगी।’ भारत के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में दालों, सब्जियों और चिकन का हिस्सा 12 फीसद है। इसका मतलब है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी से आरबीआई के सामने बड़ी चुनौती पैदा हो जाएगी। आरबीआई ने उपभोक्ता कीमत बढ़ोतरी 2 से 6 फीसद के बीच रखते हुए इस साल देश का पहला महंगाई लक्ष्य जारी किया है। इस साल महंगाई इन स्तरों के बीच रहने से राजन ने ब्याज दरें कुल 75 आधार अंक कम की हैं।

Advertisements