महंगाई रोकने को उतरी सरकार

नई दिल्ली ब्यूरो। केंद्र ने राज्य सरकारों को आवश्यक वस्तुओं की महंगाई रोकने में सख्ती व मुस्तैदी दिखाने को कहा है। जमाखोरों व कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़े प्रावधानों के साथ खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार लाने की हिदायत दी गई है। दाल समेत अन्य जिंसों की महंगाई के बीच आयोजित खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन में खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने राज्यों से महंगाई से निपटने के लिए कमर कसकर तैयार रहने को कहा है।

mehngai320_020313060346खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन की अध्यक्षता पासवान व कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने संयुक्त रूप से की। सिंह ने कहा कि मानसून कमजोर होने के पूर्वानुमान को देखते हुए सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने के लिए मूल्य स्थिरीकरण योजना शुरू की है। जबकि बाजार हस्तक्षेप योजना पहले से ही चल रही है। इससे वस्तुओं के मूल्य नहीं बढ़ने पाएंगे। राज्य सरकारों से कहा गया कि वे अपने नागरिक आपूर्ति, निगमों और सहकारी समितियों को खाद्यान्न वितरण के बंदोबस्त के लिए मजबूत बना लें। अपने गोदामों में पर्याप्त अनाज का भंडारण भी कर लें, ताकि जरूरत के समय आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

खाद्य मंत्री पासवान ने राज्यों के खाद्य मंत्रियों से कहा, ‘अतार्किक तरीके से हम महंगाई नहीं बढ़ने देंगे।’ राज्य सरकारों को चाहिए कि वे जमाखोरी व कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त से सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने दावा किया, ‘प्याज व दालों के मूल्य को छोड़कर बाकी जिंसों के मूल्य में कोई वृद्धि नहीं हुई है।’ लिहाजा दुखी होने की कोई जरूरत नहीं है। देश की घरेलू जरूरतों के लिए अनाज का पर्याप्त स्टॉक है। महंगाई की एक बड़ी वजह जमाखोरी है। राज्य के खाद्य सचिवों को सलाह देने के अंदाज में कहा कि जुलाई से नवंबर के बीच मांग व आपूर्ति में असंतुलन होने की दशा में जमाखोर व कालाबाजारी करने वाले अति सक्रिय हो जाते हैं। इस दौरान मुस्तैदी बरतनी बहुत जरूरी है। पासवान ने बताया कि केंद्र ने दाल व प्याज की महंगाई के मद्देनजर कई एहतियाती कदम उठाए हैं। राज्यों को चाहिए कि वे इस अहम मौके पर सख्त कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

दिसंबर तक लागू होगी एक लाख पच्‍चीस हजार करोड़ की खाद्य सुरक्षा योजना

नई दिल्‍ली। दिसंबर तक लगभग एक लाख पच्‍चीस हजार करोड़ रुपये की देशव्‍यापी खाद्य सुरक्षा योजना का क्रियान्‍वयन हो जाएगा। इससे देश की 120 करोड़ की आबादी में से 67 फीसदी लोगों को सस्‍ता चावल और गेहूं मिलना संभव होगा। पिछली यूपीए सरकार द्वारा 2013 के अगस्‍त में स्‍वीकृ‍त नेशनल फुड सिक्‍युरिटी एक्‍ट (एनएफएसए) का क्रियान्‍वयन देश के 29 राज्‍यों और सात केंद्रशासित प्रदेशों को एक साल के भीतर ही करना था, लेकिन इसकी डेडलाइन बढ़ती चली गई।
राज्‍यों ने मिस की कई बार डेडलाइन
कई बार डेडलाइन मिस करने के बाद देश के महज 11 राज्‍य इस योजना का क्रियान्‍वयन करने में सफल रहे हैं और बाकी राज्‍य केंद्र से तारीख पर तारीख मांगते चले गए, जिससे देशभर में इसका क्रियान्‍वयन नहीं हो पाया है। राज्‍यों के खाद्य मंत्रियों की एक बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उपभोक्‍ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि आखिरकार अधिकांश राज्‍य दिसंबर तक इसके क्रियान्‍वयन पर राजी हो गए हैं, क्‍योंकि सितंबर तक की अगली डेडलाइन के भी चंद महीने ही बचे थे।
फरवरी के अपने बजट में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने फुड सब्सिडी के लिए 20.11 अरब डॉलर यानी 1.24 ट्रिलियन रुपये की राशि आवंटित की थी।
कीमतें और जमाखोरी बढ़ने से केंद्र चिंतित
इससे पहले दालों और अन्‍य कमोडिटी की कीमतों के बढ़ने से चिंतित केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्‍यों से खाद्यान्‍न की जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करने के लिए कहा। केंद्र राज्‍य सरकारों को खाद्यान्‍न की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में आपूर्ति बढ़ाने की भी सलाह दी।
राज्‍यों को भंडारण क्षमता बढ़ाने की सलाह
बैठक में राज्‍यों से अपनी स्‍टोरेज क्षमता बढ़ाने के अलावा प्रमुख कमोडिटी का उचित वितरण सुनिश्चित करने के लिए निगमों और कॉपरेटिव को भी इस काम से जोड़ने के लिए कहा गया।
फुड सिक्‍युरिटी के मसले पर राज्‍यों को दी चेतावनी
बैठक के दौरान नेशनल फुड सिक्‍युरिटी कानून के क्रियान्‍वयन के मसले पर केंद्र ने 24 राज्‍यों व यूटी को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वे सितंबर तक इस स्‍कीम का क्रियान्‍वयन नहीं करते हैं तो उन्‍हें अतिरिक्‍त खाद्यान्‍न का आवंटन रोक दिया जाएगा। लेकिन बाद में पत्रकारों से बातचीत में पासवान ने कहा कि दिसंबर तक इसके क्रियान्‍वयन पर अधिकांश राज्‍य तैयार हो गए हैं।

(दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में दालों की खुदरा कीमत)

 

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