सेवा कर भुगतान में सावधानी रखकर नुकसान से बचें

कानपुर : वैसे तो सेवा कर साल में साल में 10 लाख रुपए से अधिक की सेवा देने पर ही लगता है। लेकिन एक ऐसी भी स्थिति है जब यह 10 लाख रुपए से कम सेवा देने पर भी लग जाता है। एक और मामले में तो यह पहले दिन से ही लगने लगता है। ऐसे ही कुछ और नियम भी हैं तो सेवा के व्यवसाय में लगे कारोबारियों को खासा परेशान करते हैं। हालांकि इनकी गंभीरता से जानकारी करें वे परेशानियों से बच सकते हैं।पहली जून से सेवा कर की दर 12.36 फीसदी से बढ़ाकर 14 फीसदी कर दी गई हैं।

d119211046जो भी कारोबारी साल में ग्राहकों को 10 लाख रुपए से अधिक की सेवा देता है उसे सेवाकर देना होगा। सेवाकर की गणना पिछले साल और मौजूदा साल के कुल कारोबार के आधार पर की जाती है। इस नियम को यदि देखें तो इससे यह भी लगता है कि यदि साल में सेवा 10 लाख रुपए से कम दी है तो सेवाकर नहीं देना होगा पर ऐसा नहीं है। यदि कोई कारोबारी इस नियम को मानकर चलता है तो उसे दिक्कत हो सकती है। नियमों के मुताबिक एक बार सेवाकर देने के बाद यदि अगले साल 10 लाख रुपए से कम की सेवा दी है तो भी सेवाकर देना होगा। यहां सेवाकर की गणना पिछले साल के आधार की जाएगी। मान लीजिए एक कराबारी ने वर्ष 2013-14 में दस लाख की सेवा देने पर कर दिया है।

अगले साल यानी 2014-15 में उसने ग्राहकों को 10 लाख से कम की सेवा दी है तो भी उसे सेवाकर देना होगा। यदि कारोबारी फिर अगले साल यानी 2015-16 में आठ लाख की ही सेवा दी है तो उसे सेवाकर नहीं देना होगा। इसी तरह यदि कोई कारोबारी किसी सेवा की फ्रेंचायजी लिए है। उसे पहले दिन से ही सेवा कर देना होगा भले ही उसने साल में 10 लाख रुपए से अधिक की सेवा लोगों को दी हो या न दी हो। इसके पीछे कारण यह है कि फ्रेंचायजी के पीछे एक बड़े ब्रांड का सहारा होता है। जो सेवाकर के दायरे में पहले ही दिन से आ जाता है।

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