दस गुना हाउस टैक्स व बिजली तोड़ रही लघु उद्योगों की कमर

कानपुर प्रमुख संवाददाताग्लोबल चुनौतियों के बीच अस्तित्व को जूझती छोटी इकाइयों के लिए सरकारी नियम ही काल बन गए हैं। फैक्ट्रियों का हाउस टैक्स दस गुना बढ़ा दिया गया है। बिजली की दरें दस प्रतिशत बढ़ गई हैं। बैंक लोन के नाम पर दर्जनों ऐसे शुल्क वसूलते हैं, जो छोटे उद्यमी के लिए आफत बन गए हैं। ढेरों परेशानियों का सामना कर रहे छोटे उद्यमियों की इस आवाज को लघु उद्योग भारती के सालाना साधारण सभा में उठाया गया। रविवार को गुमटी नंबर पांच चौराहे के पास एक रेस्टोरेंट में आयोजित साधारण सभा की शुरुआत भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यापर्ण के साथ की गई। लघु उद्योग भारती के प्रदेश महामंत्री रवीन्द्र कुमार ने बताया कि आज एसएमई सेक्टर की बड़ी संस्थाओं में से एक है। यूपी में संस्था के दो हजार सदस्य हैं और देशभर में सदस्यों की संख्या 12,500 से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि लघु उद्यमियों के लिए कठिनाइयों और चुनौतियों का दौर है। यह समय सरकार और प्रशासन को घेरने का है। उत्पीड़न पर शांत होकर न बैठें, अधिकारियों को पत्र दें और खुलकर बात करें। फैक्ट्रियों पर टैक्स का बोझ:लघु उद्योग भारती के संयोजक लाडली प्रसाद ने मुख्य अतिथि सलिल विश्नोई से स्थानीय स्तर की समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2006-07 में एक फैक्ट्री पर हाउस टैक्स दस हजार था। वर्ष 2008 में इसे बढ़ाकर 35 हजार रुपए कर दिया गया। वर्ष 2014-15 में गृहकर की नई दरें लगा दीं। सर्किल रेट के हिसाब से हाउस टैक्स की दरें तय कर दीं। इस हिसाब से करीब 600 वर्गमीटर की एक फैक्ट्री पर हाउसटैक्स एक लाख रुपए से ज्यादा हो गया है। बिजली दरें भी दस प्रतिशत बढ़ा दी गई हैं। ऊपर से केस्को दो महीने एडवांस बिल मांग रहा है। ये हाल तब है कि जब इंडस्ट्रियल एरिया में सिर्फ तीन प्रतिशत लाइनलॉस है। 99 प्रतिशत उद्यमी समय से बिजली का बिल जमा करते हैं। उन्होंने कहा कि 60-70 साल पहले फजलगंज बसा था। तब वहां रिहायशी इलाका नहीं था और शहर से दूर था। आज फजलगंज फैक्ट्री एरिया शहर के बीच में आ गया है। फैक्ट्री एरिया में घर भी बन गए हैं और दुकानें भी।अगर इस जमीन को फ्रीहोल्ड कर दिया जाए तो उद्यमियों को राहत मिलेगी और प्रदूषण भी कम होगा।

 

ग्रीस संकट से भारतीय अर्थव्यवस्था बेअसर

कानपुर। फ्रेंकलिन टेम्पलेशन के क्लस्टर हेड स्वरूप भड्डबडेकर ने बताया कि ग्रीस संकट का सीधे तौर पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारी प्रवृत्ति बचत की है। हम सौ रुपए कमाते हैं और 25 रुपए बचाते हैं। ग्रीस में ठीक उल्टा है। वहां उधार लेकर खर्च करने की परम्परा है, इसीलिए वहां दिवालिया होने की नौबत आ गई। इस संकट से सिर्फ डॉलर के रेट पर असर पड़ेगा। रुपया कमजोर नहीं होगा। उन्होंने भारतीय कंपनियों के शेयरों में कम रुचि लेने पर खिंचाई करते हुए कहा कि भारतीय उत्पाद तो खूब खरीदते हैं लेकिन जब शेयर खरीदने की बात आती है तो विदेशी कंपनियों में पैसा दांव पर लगाते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हमें देशी कंपनियों के शेयर खरीदने में रुचि लेना चाहिए, तभी हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। बैंक ऑफ बड़ौदा के सहायक महाप्रबंधक वीके सेठी ने लोन प्रक्रिया के बारे में बताया कि जिस तरह आप डॉक्टर से अपनी केस हिस्ट्री खुलकर बयां करते हैं। उसी तरह बैंकर से अपने प्रोजेक्ट के बारे में खुलकर बताएं। शुरु से ही सही बात बताएं ताकि बैंक आपकी मदद कर सके। उन्होंने कोलेट्रल फ्री लोन की जानकारी देते हुए कहा कि सिर्फ प्रोजेक्ट लाइए, फैक्ट्री बैंक लगाएगा। एसएमई- कोलेट्रल फ्री लोन स्कीम के तहत एमएसएमई एक्ट के तहत इस स्कीम में एक करोड़ रुपए तक का लोन मिलता है। महामंत्री महेश वरियानी, नवीन खन्ना, अमन घई, पुनीत गुप्ता, विपिन खुल्लर, सुनील निर्मल, अनुज गुप्ता आदि मौजूद थे।

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