मिलावट के नए तरीके,अब हल्दी, धनिया और मिर्च के भी आए एसेंस

कानपुर प्रमुख संवाददाता :

मसालों की महक के बिना रसोई की कल्पना नहीं की जा सकती लेकिन मिलावटखोरों ने इसे भी नहीं बख्शा। मसालों में हाइटेक मिलावट होने लगी है। बाजार में ऐसे रेजिन, अर्क और एसेंस आ गए हैं, जो मसालों को नकली खुशबू से महका देते हैं और चटकदार रंग से खूबसूरत बना देते हैं। सस्ता बेचने की होड़ में मसालों की जगह उनकी लकड़ी, पत्तियां और भूसी मिलाई जा रही है। हल्दी से उठती खुशबू, चटक लाल मिर्च पाउडर, धनिया की महक और गरम मसालों का तीखापन ही उनकी शुद्धता की पहचान माना जाता है। कोचीन से आने वाले रेजिन अलग-अलग मसालों की खुशबू के हैं। इसकी एक बड़ी वजह महंगाई भी है। तीन साल में मसालों के दाम तीन गुना ज्यादा हो गए।

लिक्विड फार्म में आने वाले एसेंस या रेजिन मिर्च, हल्दी, धनिया, लौंग, दालचीनी, तेजपत्ता सहित सभी मसालों के आते हैं। कीमत है करीब 1000 से 1200 रुपए किलो। एक किलो रेजिन से 50 किलो घटिया मसाला बिल्कुल शुद्ध मसाले की तरह महकता है और तीखापन देता है। रेजिन दो तरह के आते हैं। एक आयल बेस्ड और एक वाटर बेस्ड। आयल बेस्ड ज्यादा देर तक टिका रहता है जबकि वाटर बेस्ड की जिंदगी कम होती है। रेजिन मिले मसाले की पहचान यह है कि इसे जुबान में रखते ही पूरा मुंह तीखा या कड़वा हो जाता है। असली मिर्च या दालचीनी जैसे मसाले जुबान को तीखा करते हैं न कि पूरे मुंह को।

असली लौंग 1000 रुपए किलो है जबकि लौंग की लकड़ी 250 रुपए किलो मिल जाएगी। लकड़ी में भी लौंग की खुशबू आती है लेकिन स्वाद नहीं। तेजपत्ता और दालचीनी का भी यही हाल है। एक नंबर की धनिया 90 रुपए किलो है। टूटी 80 रुपए किलो और भूसी 60 रुपए किलो है। मिर्च 90 रुपए किलो है और मिर्च का खोखला पत्ता 50 रुपए किलो में मिल जाएगा। हल्दी में पिसा मक्का धड़ल्ले से मिलाया जा रहा है और धनिया में भूसी। खास बात यह कि टेस्टिंग में भी इसे नहीं पकड़ा जा सकता क्योंकि मक्का और भूसी दोनों ही खाने योग्य वस्तुओं की फेहरिस्त में आते हैं।

लोगों में जागरुकता बढ़ रही है। खुले मसालों में मिलावट के डर ब्रांडेड मसालों की तरफ ग्राहक रुख कर रहे हैं, इसीलिए ब्रांडेड मसालों की मांग तेजी से बढ़ी है। तमाम ब्रांड तो खड़े मसाले से भी सस्ता माल पिसा हुआ पैकिंग में बेच रहे हैं। ग्राहकों को इसी से समझ जाना चाहिए कि उसकी क्वालिटी का स्तर क्या होगा। मेरा मानना है कि कम खाएं लेकिन शुद्धता से समझौता न करें। -अंचल कुमार, निदेशक मार्केटिंग, अशोक मसाले

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