रिजर्व बैंक ने नहीं घटाईं ब्‍याज दरें, सस्‍ते कर्ज के लिए करना होगा और इंतजार

नई दिल्‍ली. महंगाई की बढ़ती रफ्तार ने आखिरकार कर्ज सस्‍ता होने की राह रोक दी। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को अपनी मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू में रेपो रेट में कोई कटौती नहीं की और उसे 7.25 फीसदी पर बनाए रखा है। आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने चालू वित्‍त वर्ष की अपनी तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा ( bi-monthly monetary policy) पेश करते वक्त महंगाई को तरजीह दी और रेपो रेट में कोई कटौती नहीं करने का फैसला किया है। आरबीआई गनर्वर ने सीआरआर को 4 फीसदी और एसएलआर 21.5 फीसदी पर बरकरार रखा है। रिटेल महंगाई दर जून में आठ माह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, इससे पहले 2 जून को आरबीआई गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी। रिजर्व बैंक अगली मौद्रिक पॉलिसी समीक्षा 29 सितंबर को पेश करेगा।
क्‍यों नहीं हुई दरों में कटौती
1. मानसून की स्थिति अभी साफ नहीं है।
2. पिछली कटौती का फायदा ग्राहकों तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है।
3. अमेरिका के फेडरल रिजर्व की स्‍ट्रैटजी का इंतजार।
4. हाल के दिनों में खाने पीने की चीजों की महंगाई में इजाफा
महंगाई के आगे के आंकड़ों से तय होगी कटौती: राजन
आरबीआई गर्वनर रघुराम राजन ने कहा कि हाल में खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में आरबीआई लगातार महंगाई के आंकड़ों पर नजर रख रहा है। आगे ब्‍याज दरों में कटौती का फैसला महंगाई के स्‍तर को देखने के बाद लिया जाएगा। आरबीआई ने अपनी मौद्रि‍क नीति‍ की घोषणा करते हुए कंज्‍यूमर प्राइस इंडेक्‍स (सीपीआई) महंगाई दर का अनुमान घटा दि‍या है। आरबीआई ने जनवरी-मार्च के लि‍ए सीपीआई महंगाई दर का अनुमान 0.2 फीसदी कम कर दि‍या है।
मॉनिटरी पैनल पर सरकार के साथ मतभेद नहीं
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मॉनिटरी पॉलि‍सी कमेटी (एमपीसी) को लेकर सरकार के साथ कोई मतभेद नहीं है। हम इस संबंध में सरकार से बातचीत कर रहे हैं। एमपीसी को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच सहमति‍ बनी है। अब तक पॉलि‍सी पर आरबीआई गर्वनर का वीटो अधि‍कार कायम है। राजन ने कहा कि सुझाव को सुझाव की तरह देखा जाए लेकिन अंतिम फैसला गवर्नर का ही रहता है। बता दें कि फाइ‍नेंशियल पैनल कोड के रिवाइज्ड ड्रॉफ्ट में कहा गया है कि पॉलिसी रेट तय करने का अधिकार सात मेंबर्स वाले एमपीसी को होना चाहिए, जिसमें आरबीआई गवर्नर का वीटो न हो।
2015-16 में विकास दर 7.6 फीसदी रहने का अनुमान
आरबीआई ने अनुमान जताया है कि‍ भारत की ग्रोथ रेट में सुधार देखा जाएगा। वहीं, शहरी उपभोग की मांग में भी इजाफा आने की उम्‍मीद है। इसके अलावा, आरबीआई ने वि‍त्‍त वर्ष 2015-16 के लि‍ए आउटपुट ग्रोथ का अनुमान 7.6 फीसदी रखा है।
अगस्‍त अंत से पहले बैंकिंग लाइसेंस का ऐलान
 रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने कहा कि स्‍मॉल और पेमेंट बैंक के लिए अगस्‍त अंत से पहले नए लाइसेंस जारी करेगा। इसके जरिए छोटे बैंकों का रास्‍ता खुलेगा।
अगली पॉलिसी समीक्षा से पहले रेट कट मुमकिन: राजन
रिजर्व बैंक गवर्नर रघुराम राजन ने संकेत दिए हैं कि 29 सितंबर को होने वाली अगली मौद्रिक पॉलिसी समीक्षा से पहले केंद्रीय बैंक ब्‍याज दरों में कटौती कर सकता है। यह अर्थव्‍यवस्‍था के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। इनमें जुलाई के खुदरा और थोक महंगाई के साथ-साथ जून माह के आईआईपी के आंकड़ों का अहम रोल रहेगा।
प्रमुख दरें रेट (फीसदी में)
रेपो रेट 7.25
रिवर्स रेपो रेट 6.25
सीआरआर 4.0
एसएलआर 21.5
जनवरी से अब तक तीन बार दरों में हो चुकी है कटौती
 रिजर्व बैंक जनवरी से अब तक रेपो रेट में तीन बार कटौती कर चुका है। आरबीआई गवर्नर दो बार सरप्राइज रेट कट कर चुके हैं। जबकि पिछली बार 2 जून को मौद्रिक समीक्षा नीति में रेपो रेट में कटौती हुई थी। आरबीआई गवर्नर ने 15 जनवरी को रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी। इसके बाद 4 मार्च को आरबीआई ने फि‍र एक बार 0.25 फीसदी की कटौती कर सबको चौंका दिया था। इसके बाद 2 जून को पॉलिसी समीक्षा में गवर्नर ने चौथाई फीसदी दरे घटाई थीं। दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक नहीं पहुंचाए जाने से नाराज आरबीआई गवर्नर राजन ने बैंकों कड़ी फटकार लगाई थी। जिसके बाद सरकारी और निजी क्षेत्र के कई बैंकों ने 2 जून को रेपो रेट में हुई कटौती के बाद अपनी होम और ऑटो लोन की ब्‍याज दरों में कमी की थी।
क्या है रेपो रेट और सीआरआर?
 रेपो दर यानी जिस रेट पर बैंक अपनी फौरी जरूरत के लिए रिजर्व बैंक से कैश उधार लेते हैं। यह रेट पहले अभी 7.25 फीसदी है। कैश रिजर्व रेशो यानी सीआरआर वह रकम जो बैंकों को रिजर्व बैंक के पास रखनी होती है। यह रेट 4 फीसदी पर है।
इंडस्‍ट्री को लगा झटका
 इंडस्‍ट्री इकोनॉमी की रफ्तार बढ़ाने के लिए उम्‍मीद कर रही थी कि रिजर्व बैंक गवर्नर इस बार भी मौद्रिक समीक्षा में ब्‍याज दरों में कटौती करेंगे। लेकिन, रिजर्व बैंक की तरफ से दरों में कटौती नहीं किए जाने से इंडस्‍ट्री को तगड़ा झटका लगा है। इंडस्‍ट्री डिमांड बढ़ाने के लिए कटौती का बेसब्री से इंतजार कर रही थी।
  
अभी नहीं घटेगी कर्ज की ईएमआई
 रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में कटौती नहीं किए जाने से बैंक भी कर्ज की दरें घटाने से परहेज करेंगे। इस तरह रिजर्व बैंक के इस फैसले से होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन के सस्‍ता होने और पुराने कर्जों की ईएमआई कम होने की ग्राहकों की उम्‍मीदों को झटका लगा है। अभी कई बैंकों की बेस रेट औसतन 10 फीसदी के आसपास है। बेस रेट किसी बैंक की वह न्‍यूनतम उधारी दर होती है। यानी बैंक इससे कम पर कर्ज नहीं दे सकते हैं।
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