केंद्र सरकार ने 14वां प्रवासी भारतीय दिवस बेंगलुरु में आयोजित करने की घोषणा की

प्रवासी भारतीय दिवस:
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस की शुरूआत की थी ताकि विदेशों में रहने वाले 2.5 करोड़ भारतीयों से संबंध प्रगाढ़ किए जाएं. एनआरआई और पीआईओ का यह सालाना कार्यक्रम 2015 तक चला.
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2015 में सरकार ने फैसला किया कि इसे हर दो साल पर एक बार आयोजित किया जाएगा.
प्रवासी भारतीय दिवस भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है. इसी दिन महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से स्वदेश वापस आये थे. प्रवासी भारतीय दिवस मनाने की संकल्पना स्वर्गीय लक्ष्मीमल सिंघवी के दिमाग की उपज थी.
इस अवसर पर प्रायः तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जाता है. इसमें अपने क्षेत्र में विशेष उपलब्धि प्राप्त करने वाले भारतवंशियों को सम्मानित किया जाता है तथा उन्हे प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किया जाता है.
उद्देश्य:
• अप्रवासी भारतीयों की भारत के प्रति सोच, उनकी भावनाओं की अभिव्यक्ति के साथ ही उनकी अपने देशवासियों के साथ सकारात्मक बातचीत के लिए एक मंच उपलब्ध कराना.
• भारतवासियों को अप्रवासी बंधुओं की उपलब्धियों के बारे में बताना तथा अप्रवासियों को देशवासियों की उनसे अपेक्षाओं से अवगत कराना.
• भारत की युवा पीढ़ी को अप्रवासी भाईयों से जोड़ना.
• भारतीय श्रमजीवियों को विदेश में किस तरह की कठिनाइयों का सामना करना होता है इस तथ्य के बारे में विचार-विमर्श करना.

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