ज्वैलरी बाजार में चीन के सारे हथकंडे फेल

कानपुर प्रमुख संवाददाता

%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b2%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%9a%e0%a5%80%e0%a4%a8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8मशीनी दुनिया में चीन ने भले ही सेंध लगा ली हो लेकिन ज्वैलरी बाजार में चीन के सारे हथकंडे फेल हो गए। ग्राहकों ने चीन की बनी ज्वैलरी को पूरी तरह से नकार दिया है। इसकी वजह है कि भारतीय कारीगरों के हाथों का हुनर, सराफा व्यापारियों की साख और जेवर से लोगों का भावनात्मक संबंध। इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल और खिलौनों की तरह चीन ने हमारे सराफा बाजार में भी घुसपैठ की कोशिश की लेकिन यहां उसकी रणनीति फेल हो गई। दरअसल चीन में गहने बनाने के लिए भी ऑटोमैटिक मशीने हैं। एक-एक डिजायन के पांच-पांच लाख सेट तैयार होते हैं। उन्हें दुनियाभर में भेजा जाता है। भारत में जेवर महज फैशन की चीज नहीं हैं बल्कि जेवर का संबंध भावनाओं से है। चीनी मशीनों से बने गहनों में वो बात नहीं थी, जो हमारे कारीगरों से तैयार गहनों में है। कारीगरों के बनाए जेवरों की डिजायनें अलग होती हैं। साथ ही संबंधित सराफा व्यापारी की साथ से जुड़ी होती है। इसी वजह से चीनी ज्वैलरी फ्लाप हो गई।

इसके बावजूद चीन ने ठप्पा हटाने के लिए एक चाल चली। अपना सारा माल थाईलैंड के रास्ते भारत भेजने लगा ताकि कम ड्यूटी पर अपना माल भारत भेज सके और व्यापारियों को ज्यादा कमीशन देकर माल बेचने के लिए मजबूर किया जा सके। पहले समझौते के तहत थाईलैंड से आयात होने वाले उत्पादों पर सिर्फ दो फीसदी ड्यूटी थी। चीन के इस खेल का राज खुला तो थाईलैंड से आने वाले माल पर भी 14 फीसदी ड्यूटी लग गई। 50 हजार के करवा, 10 हजार के ताश: इस बार करवाचौथ और दिवाली के लिए सराफा शोरूम अभी से सज गए हैं। करवाचौथ की लंबी रेंज है। 6500 से 50 हजार रुपए तक के करवा काशी ज्वैलर्स, सोना-चांदी ज्वैलर्स, सोना ज्वैलर्स, लाला काशीनाथ सेठ ज्वैलर्स, श्री जुगल किशोर ज्वैलर्स बिरहाना रोड और गोविन्द नगर आदि में मौजूद हैं। चांदी के पूजन थाल 25 हजार रुपए तक हैं। एक से बढ़कर एक एंटीक और डेकोरेटिव पीस का कलेक्शन देखने को मिलेगा। चांदी से बने राजस्थानी संस्कृति के रथ की कीमत लगभग 60 हजार रुपए हैं। वाइन बॉटल, चांदी के ताश के पत्ते, चांदी की ट्रेन, फलों की डलिया, बाउल्स, जूस ग्लास, आइसक्रीम ग्लास, लस्सी ग्लास, शंकर जी का मंदिर, शिवलिंग, राधाकृष्ण की मूर्ति, लक्ष्मी-गणोश मिल जाएंगे।

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s