चाइना पर निर्भर भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री

कानपुर. भारत में चीन के प्रोडक्ट का विरोध भले ही हो रहा हो, लेकिन भारत की प्लास्टिक इंडस्ट्री चाइना में बनाई गई डाई पर ही निर्भर है। इस इंडस्ट्री से जुड़े व्यापारियों के मुताबिक, भारत में बनने वाली 90 फीसदी प्लास्टिक कुर्सी के डाई का इम्पोर्ट चाइना से, जबकि 7 फीसदी ताइवान और 3 फीसदी इटली के बाजार से होता है।

चाइना के साथ ताइवान और इटली से भी होता है डाई का इम्पोर्ट
– परफेक्ट कंपनी के मालिक मुन्ना सिंह ने बताया, जब साल 1999 में अपने फर्म शिवा पॉलि प्लास्ट प्रा लिमि की शुरुवात की थी, उस समय डाई ताइवान या इटली से इम्पोर्ट होती थी।
– साल 2003 – 04 में चाइना की डाई बाजार में आई। ताइवान और इटली के मुकाबले यह सस्ती होने के कारण इसकी मांग सबसे ज्यादा हुई।
– इनके मुताबिक, महाराष्ट्र में प्लास्टिक के हर सामान के लिए डाई का प्रोडक्शन हो रहा है, लेकिन कुर्सियों की डाई के लिए हम आज भी चाइना पर निर्भर है।
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यूं बनते है प्लास्टिक के सामान –
– व्यापारी मुन्ना सिंह के मुताबिक, सॉफ्ट पॉली प्रोपेलीन से बाल्टी, मग, जैसे घरेलु सामान, जबकि हार्ड डेनसिटी प्रोपेलीन से कुर्सी, टेबल, स्टूल और कैरट जैसे सामान बनाए जाते हैं।
– इस कच्चे माल की सप्लाई रिलायंस, हल्दिया, इंडियन आयल और एचएमईएल कंपनी से होती है।
– कच्चे तेल से जब पेट्रोल बनाते है तब उस दौरान पॉली प्रोपेलीन बनता है।
– प्रोपेलीन पूरी तरीके से सफेद होता है। बस प्रोडक्शन के समय कारोबारी इसमें कलर मिक्स करते है।
– 100 किलो पॉली प्रोपीलीन में 2 फीसदी कलर प्रोपेलीन मिलाकर उसे पुरे रॉ मटेरियल को एक कलर देता है।
– इन्होंने बताया, छोटे सामान के लिए करीब 100 से 120 डिग्री तापमान पर बनाया जाता है, जबकि दूसरे बड़े सामान के लिए ढाई सौ डिग्री तापमान ऊपर होता है।
– डाई के जरिए बाल्टी, मग और कुर्सी टेबल बन जाते है।
क्या है डाई –
– प्लास्टिक के सभी सामान जो घरों में या किसी अन्य जगह इस्तेमाल होते है, उन्हें बनाने के लिए डाई ( खांचा ) का इस्तेमाल करना पड़ता है।
– बाल्टी-टब हो या कुर्सी-टेबल सभी के लिए ढांचे होते है।
– व्यापारी मुन्ना सिंह ने बताया, ज्यादातर प्लास्टिक के सामान बनाने के लिए भारत में ही ढांचा तैयार किया जा रहा है।
– डिमांड के मुताबिक ही डाई के सहारे मैन्युफैक्चर माल का प्रोडक्शन करवाते है।
24 घंटे होता है काम –
– प्लास्टिक इंडस्ट्री की मशीने 24 घंटे चलती है। एक शिफ्ट 12 घंटे की होती है।
– साइज के मुताबिक एक शिफ्ट में 600 से 1000 सामान का प्रोडक्शन होता है।
– इसके पैकेजिंग और कर्मचारियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
जीएसटी का है इंतज़ार –
– इस इंडस्ट्री पर 12 फीसदी वैट के बाद 2 फीसदी सैस भी लगता है। ऐसे में कानपुर की इंडस्ट्री को जीएसटी का इंतजार है।
– को-ऑपरेटिव इंडस्ट्रियल स्टेट के चेयर मैन विजय कपूर ने बताया, सभी व्यापारी जीएसटी को सपोर्ट कर रहे हैं।
– जीएसटी के बाद 2 फीसदी सैस खत्म हो जाएगा। जिससे टैक्स पे करने के लिए सभी को आसानी होगी।
kk2_1478948647यूपी प्लास्टिक कमोडिटी का सबसे बड़ा बाजार  
– प्लास्टिक के घरेलू  सामान का सबसे बड़ा मार्केट यूपी है, जबकि दूसरे नंबर पर दिल्ली आता है।
– व्यापरी मुन्ना के मुताबिक, प्लास्टिक कमोडिटी का 60 फीसदी खपत अकेले यूपी में है, जबकि 20 फीसदी दिल्ली और बाकी का 20 फीसदी में पूरा भारत है।
70 फीसदी पर रिसायकिल इंडस्ट्री का कब्जा  
– इन्होंने बताया, कुर्सी को लेकर रिसायकिल प्रोडक्शन उद्योग भी तेजी से बढ़ रहा है।
– वर्तमान में 70 फीसदी बाजार पर रिसायकिल मैन्युफैक्चरिंग सेंटर का कब्जा है, जबकि 5 फीसदी घरेलू सामानों पर।
– रिसायकिलिंग के बाद बनने वाली कुर्सी-टेबल में शाइनिंग नहीं होती, जबकि दूसरे घरेलू  सामान में मैटेलिक कलर रिसायकिल मैन्युफैक्चरिंग की पहचान है।
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