आने वाले छह माह बहुत कठिन :नोट बंदी के बाद 13वें दिन शहर के सभी औद्योगिक संगठनों ने एक मंच पर आकर समस्याएं बताईं

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’ उद्योगों द्वारा लिए गए लोन 50 दिनों का ब्याज किया जाए माफ ’ सीसी की लिमिट डेढ़ लाख रुपए की जाए ’ उद्यमियों के लिए टैक्स लिमिट तत्काल बढ़ाई जाए ’ मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को इस बाबत भेजें पत्र’ 50 हजार रुपए की लिमिट रोजाना होनी चाहिए

500 और 1000 रुपए के नोट बंदी के बाद शहर का उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गया है। नोट बंदी के बाद 13वें दिन शहर के सभी औद्योगिक संगठनों ने एक मंच पर आकर समस्याएं बताईं तो सभी उद्यमियों के चेहरे पर नोटबंदी का दर्द झलका। उद्यमियों ने कहा कि उन्हें घर चलाने भर के पैसे बैंकों से नहीं मिल रहे तो उद्योग और कर्मचारियों को वेतन कैसे बांटें। कोपेस्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि नोट बंदी के 13 दिन हो चुके हैं। बैंकों और एटीएम से लाइनें खत्म नहीं हो रही हैं। आने वाले छह माह उद्योगों के लिए कठिन हैं। उत्तर प्रदेश होजरी एसोसिएशन के अध्यक्ष बलराम नरूला ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभाव होजरी सेक्टर को पड़ा है, क्योंकि यहां पर साप्ताहिक और मंथली पर कर्मचारी काम करते हैं। आलम यह है कि नोट बंदी के बाद से उद्यमियों के पास पैसा बांटने के लिए नहीं है।

कई उद्योग हो चुके बंद : आईआईए के पूर्व अध्यक्ष तरुण खेत्रपाल ने बताया कि कई उद्यमियों ने उद्योग बंद कर दिए हैं। इससे उनके कर्मचारी और मजदूर खाली बैठे हैं। उद्यमी आने वाले एक साल अच्छे कारोबार की उम्मीद न करें। दो साल उद्योग बे मौसम बारिश और सूखे से वैसे भी प्रभावित थे। स्कूली बच्चे हो रहे परेशान : पीआईए के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बंका ने कहा कि स्कूली बच्चों को परेशानी आ रही है। केन्द्र सरकार के आदेश आने के बाद भी बैंक उनका पालन नहीं कर रहे हैं। शादी वाले परिवारों को ढाई लाख रुपए दिए जाने का आदेश अभी तक नहीं आया है। गेहूं के दाम आसमान पर पहुंच गए हैं।

बुनियादी समस्याओं पर ध्यान नहीं : आईआईए के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील वैश्य ने बताया कि बुनियादी समस्याओं पर केन्द्र सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है। 90 फीसदी तक उद्योग प्रभावित हुए हैं। सेल आठ करोड़ से घटकर दो करोड़ : फीटा के अध्यक्ष मुरारीलाल अग्रवाल ने कहा कि उनकी सेल आठ करोड़ रुपए थी, जो घटकर दो करोड़ रह गई है। गुजरात का ट्रांसपोर्टर नगद लेने के लिए एक दिन से बैठा है लेकिन उसे नकद रकम देने के लिए पैसा नहीं है। इस मौके पर नवीन खन्ना, एएस कोतवाल, हरीश इसरानी, अनिल पाण्डे, सुनील गुप्ता, दिनेश अहूजा, शैलेन्द्र सेठी आदि रहे।

कानपुर बैटरी उद्योग के अध्यक्ष मांगेलाल बंसल ने कहा कि इस समस्या का समाधान फरवरी में होने वाले विधानसभा के चुनाव में दिखाई देगा। उद्योग और व्यापारी पूरी तरह से टूट चुका है। नोट बंदी के दूरगामी परिणाम उद्योग और व्यापारियों के लिए बहुत खराब होंगे।केन्द्र सरकार के नोट बंदी के फैसले से जीडीपी दर और तेजी से गिरेगी। दर गिरने के बाद विभागों को टैक्स बड़ी कम मात्र में जाएगा। इसके बाद सरकारी विभाग सेल्स टैक्स, आयकर जैसे विभाग उद्यमियों पर अपना शिकंजा कसेंगे कि टैक्स कम कैसे आ रहा है।

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