सोच अच्छी लेकिन लागू करने का तरीका सही नहीं

bank-ac d6151कानपुर। नोटबंदी के बाद ई-भुगतान के आदेश से व्यापारी बेचैन हैं। दरअसल, बेचैनी भुगतान को लेकर नहीं बल्कि व्यवस्था बनाने की है। कारखानों में काम करने वाले अधिसंख्य मजदूरों के पास बैंक खाते ही नहीं हैं और लगभग सभी उद्योगों में दैनिक श्रमिक काम करते हैं। शाम को उन्हें नगद भुगतान देने की व्यवस्था है। सभी का यही कहना है कि कारोबारियों को भुगतान देना है चाहे नगद दें या बैंक खाते में लेकिन पहले मजदूरों को जागरूक किया जाना चाहिए। व्यवस्था लागू करने से पहले उन्हें बैंक भुगतान के लिए तैयार करना चाहिए। इस मुद्दे पर हिन्दुस्तान ने अलग-अलग उद्योग के प्रतिनिधियों से बात की। सभी ने व्यवस्था की सराहना की लेकिन इस दौरान होने वाली व्यावहारिक दिक्कतें भी गिनाईं।

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