मेड इन इंडिया’ नहीं ब्रिटेन में बने पेपर पर छप रहे नए नोट

currency-india_b_06धागा आ रहा है इटली से
नया 500 व 2000 का नोट पूरी तरह से भारत में बने मैटेरियल से नहीं बना है। छपाई को छोड़ दिया जाए तो बाकी सामान विदेशों से मंगवाया गया है। इसका कागज ब्रिटेन से तो धागा इटली, यूक्रेन और यूके से आयात किया जा रहा है। यह इसलिए किया गया ताकि जल्‍दी से जल्‍दी नोट छप सकें, नहीं तो भारत में भी कागज और धागा का निर्माण किया जाता है।

विदेशी मैटेरियल से हो रही पूर्ति

नोटबंदी के बाद जिस तरह से देशभर में कैश की किल्‍लत हुई, उसकी भरपाई के लिए आरबीआई ने ज्‍यादा से ज्‍यादा नोट छापने का काम शुरु किया है। इसके लिए प्रिंटिंग प्रेस में 24 घंटे काम चल रहा है। ऐसे में नोट की छपाई में इस्‍तेमाल होने वाला कागज और धागा कम पड़ गया। इसलिए अब बाहर से मंगवाया जा रहा। आरबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक, शुरुआत में हमारे ऊपर दबाव था। कम समय में मैटेरियल हासिल करना था। इसलिए भारत में जितना कागज और धागा था उससे नए नोट छाप दिए गए। अब जितने भी नई छपाई हो रही है वो सभी विदेशी मैटेरियल से बनी है।

देशभर में हैं चार प्रिंटिंग प्रेस :
आरबीआई की देशभर में चार प्रिंटिंग प्रेस हैं। इनमें तीन शिफ्ट में नोट छापने का काम चल रहा है।

नासिक प्रेस : यहां पर रोजाना 90 लाख नोट छापे जा रहे हैं
देवास प्रेस : यहां पर भी 90 लाख नोट प्रतिदिन छापने की सीमा है
मैसूर : मैसूर की प्रेस में रोजाना 4 करोड़ नोठ छप रहे हैं
पश्‍चिम बंगाल : यहां पर भी 4 करोड़ नोट रोजाना छापे जा रहे हैं

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