73 फीसदी नए नोट दबा गए कनपुरिए

पांच सौ और हजार के नोटबंद होने के बाद से अब तक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया कानपुर के लिए करीब 5200 करोड़ रुपए जारी कर चुका है, लेकिन इनमें से सिर्फ 1400 करोड़ रुपए वापस बैंकों में पहुंचे हैं। ऐसे में करीब 73 फीसदी लोगों ने नए नोट दबा लिए हैं। यही वजह है कि नए नोटों के लिए दिक्कत हुई है। कैश फ्लो की राह में करेंसी का जमा न होना बड़ा रोड़ा है। हालांकि पिछले चार दिनों से बैंकों में करेंसी जमा करने वालों की संख्या में खासी बढ़ोतरी हुई है। ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन ने सरकार के फैसलों पर उंगली उठाई है। इसका कहना है कि नए नोट की जमाखोरी और पब्लिक सेक्टर बैंकों पर सरकार के आरोप निराधार हैं, अगर इसी तरह करेंसी जमा होती रही तो एक बार फिर कालाधन की बाढ़ आ जाएगी।बैंक इस समय संक्रमण काल से गुजर रहे हैं। एक तरफ करेंसी के संकट का सामना कर रहे हैं तो दूसरी तरफ नए नोटों की जमाखोरी बढ़ने लगी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 52 अरब रुपए में महज 14 अरब ही बैंकों में वापस आए।

सामान्य दिनों में करेंसी वापसी का प्रतिशत 80-90 प्रतिशत के बराबर रहता है जबकि इस दौरान महज 27 फीसदी करेंसी ही बैंकों में लौटी है। वापसी इस हफ्ते सबसे ज्यादा हुई है। इससे पहले तो महज दस फीसदी करेंसी ही बैंकों तक पहुंच रही थी। साफ है कि 38 अरब रुपए बाजार में घूम नहीं, बल्कि ठहर गए हैं। इससे बैंक भी परेशान हैं।ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन की यूपी ¨वग के मंत्री सुधीर सोनकर का कहना है कि देशभर में जारी किए गए छह लाख करोड़ के नए नोटों में से आधी करेंसी गायब हो गई है। यह आखिरकार कहां गई? इतना सब हो रहा है और सरकार का निशाना पब्लिक सेक्टर बैंकों पर है। नोटबंदी के दौरान सिर्फ दो कर्मचारियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के प्रमाण मिले हैं लेकिन पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री को ही सरकार ने कठघरे में खड़ा कर दिया है। यूनियन के अध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने कहा कि आरबीआई के सामने अगले हफ्ते प्रदर्शन किया जाएगा। उन्हें प्रस्ताव भेजा जाएगा कि भ्रष्टाचार में लिप्त एक्सिस बैंक और एचडीएफसी का अधिग्रहण किया जाए।

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