कपड़ा बाजार बंद, 40 करोड़ की चपत

d141617टेक्सटाइल और बिना सिले कपड़े पर पांच फीसदी जीएसटी के विरोध में आहूत बंद का जबर्दस्त असर देखने को मिला। तीन दिवसीय हड़ताल के पहले दिन कानपुर के सभी थोक कपड़ा बाजारों के शटर तक नहीं उठे। एक दिन की बंदी से 40 करोड़ रुपए के कारोबार का नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ा।

आम सभा में तय किया गया कि कपड़े पर टैक्स के विरोध में कोई व्यापारी जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराएगा।आल इंडिया क्लाथ मर्केन्टाइल एसोसिएशन ने देशभर में तीन दिन की हड़ताल का आह्वान किया था। मंगलवार को पहले दिन जनरलगंज, काहूकोठी, नौघड़ा, बजाजा सहित सभी बाजारों में व्यापारी तो पहुंचे लेकिन दुकानें नहीं खोलीं। वरिष्ठ व्यापारी नेता काशी प्रसाद शर्मा ने कहा कि बंदी पूरी तरह सफल रही। व्यापारियों के आक्रोश का असर था कि किसी के शटर में चाबी तक नहीं लगी। उन्होंने बताया कि अहमदाबाद में टेक्सटाइल ट्रेड फेयर का बहिष्कार स्थानीय व्यापारियों ने कर दिया है। इस मेले का उद्घाटन वित्तमंत्री और कपड़ा मंत्री करने वाले हैं। नौघड़ा कपड़ा कमेटी के अध्यक्ष शेष नारायण त्रिवेदी के साथ तमाम कपड़ा व्यापारी चदरे वाली गली में एकत्र हुए, जहां से जुलूस की शक्ल में आम सभा स्थल जनरलगंज मेन रोड पर पहुंचे। केंद्र सरकार मुर्दाबाद नारों के बीच व्यापारियों ने कहा कि आदमी एक-दो दिन भूखा रह सकता है लेकिन निर्व रहना सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो मुगलों के शासन में कपड़े पर टैक्स था, न ही अंग्रेजों के समय कपड़े पर टैक्स था और न ही भारत की आजादी के बाद से अब तक कपड़े पर कोई टैक्स लगाया गया है। केंद्र सरकार यदि तत्काल जीएसटी वापस नहीं लेती है तो कपड़ा व्यापारी इस लड़ाई को जारी रखेगा। गोवर्धन साड़ी सेंटर के प्रहलाद भाई ने कहा कि जो नेता कभी चुनाव नहीं जीता हो और क्रिमिनल का वकील हो, उसे वित्तमंत्री की जिम्मेदारी सौंपकर व्यापारियों के साथ छल किया गया है। पूर्व अध्यक्ष चरणजीत सिंह सागरी ने भी विरोधदर्ज कराया।
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