GST के खिलाफ बजा बिगुल, हलधरों का मशहूर बाजार बंद रहा लाटूसरोड

Latouche Road Traders Bazar Bandh Against GST-

कानपुर। आजादी के 70 सालों में सबसे बड़े टैक्स सुधार वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के देररात से लागू हो जाने के बाद जहां कुछ कारोबारी खुश हैं तो कुछ कई दिनों से विरोध कररहे हैं। इसी कड़ी के तहत शनिवार को किसानों के समानों का सबसे बड़ा बाजार लाटूसरोड बंद रहा। यहां के व्यपारी तालेबंदी कर सड़कों पर उतर आए और इस कानून में कुछ संशोधन की मांग कर सरकार से आर-पार की लड़ाई का एलान कर दिया। बाजार बंद होने के चलते बाहर के प्रदेशों व जिलों से आए किसान काफी परेशान रहे। किसानों का कहना था कि व्यापारियों और सरकार के टकराव की जानकारी उन्हें नहीं थी, इसी के चलतें वो पैसे खर्च कर बाजार पहुंचे, लेकिन उन्हें खेती-बाड़ी का सामान नहीं मिला।
देश का सबसे बड़ा बाजार
संसद पटल पर लगी घड़ी में जैसे ही रात के 12 बजे वैसे ही पूरे देश में एक कर कानून लागू हो गया। इसके चलते कहीं आतिशबाजी हुई तो कुछ लोगों ने पूरी रात सड़क पर लेटकर प्रदर्शन किया। शहर का एतिहासिक बाजार लाटूसरोड जो पहले बंद के खिलाफ था, आज वो भी अन्य व्यापारियों के साथ खड़ा हो गया। बतादें लाटूसरोड से प्रदेश के ही नहीं दूसरे अन्य राज्यों के किसान अपनी खेती से सम्बंधित मशीनों और उपकरणों की खरीदारी करने के लिए आते हैं। खेती के उपकरणों में जीएसटी के लागू होने के बाद से बाज़ार में सन्नाटा है और व्यापारियों और कर्मचारियों में व्यापार को लेकर बेचैनी है। जीएसटी की जटिलताओं से जूझने के लिए व्यापारियों का संगठन तैयार नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि जब तक कठिनाइयों को सरल नहीं किया जाएगा व्यापार करना मुश्किल है।
…तो किसानी के सामान भी कर के दायरे में आए
खेती के उपकरणों का व्यापार कर रहे व्यापारियों के लिए जीएसटी एक आफत की तरह दिखाई दे रही है। दुकानदारों का कहना है कि अधिकतर दूसरे राज्यों से आने वाले उपकरणों में कोई टैक्स नहीं लगता था, लेकिन आज की स्थितियों में बिल काटने के समय टैक्स का निर्धारण किस तरह से किया जाय यह प्रश्न व्यापारियों को परेशान कर रहा है। लाटूसरोड के व्यापार मंडल के चेयरमैन सूरेंद्र सनेजा ने कहा कि 50 हजार की खरीदारी के साथ ही किसान भी टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। इसी के चलते वो अब सामान की खरीदारी नहीं करेंगे, जिसकी मार हम लोगों को उठानी पड़ेगी। मोदी सरकार ने बिना सोचे समझे ये बोझ हम पर रखा है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
बिना तैयारी के जीएसटी लागू
व्यापारी नेता उमेश गुप्ता कहते हैं कि जीएसटी लागू करने से पहले सरकार को इसकी जटिलताओं को खत्म करने के लिए व्यापारियों के साथ बैठक करनी चाहिए थी। उनका कहना है कि जैसे राकेट को लांच करने के लिए लॉन्चिंग पैड की जरूरत होती है उस तरह जीएसटी के लिए सरकार ने किसी तरह की तैयारी नहीं की। जीएसटी लागू होने के बाद किसानों का सामान बनाने वाली इकाइयों में अस्थिरता का माहौल रहेगा। बिना ट्रांजिट बिल के माल के परिवहन पर रोक होने की वजह से सप्लाई में कमी आएगी। इस कारण उत्पादन घटेगा। उद्यमी इस बात से चिंतित हैं कि व्यवस्थाएं बहुत जल्द सुचारु रूप से न चलीं तो कृषि औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन ठप भी हो सकता है।
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