बंद होती गई फैक्ट्रियां, छिनती गई जिले की रौनक

बंद होती गई फैक्ट्रियां, छिनती गई जिले की रौनक

बुंदेलखण्ड में कालपी के हाथ कागज उद्योग पूरे बुंदेलखण्ड के युवाओं को रोजगार मिलता था। सन 1979 के दशक में एक सैकड़ा से ज्यादा हाथ कागज उद्योग बुंदेलखण्ड की शान थी। वक्त ने ऐसी करवट ली कि धीरे धीरे कागज फैक्ट्रियां बंद होनी शुरु हो गई।

मौजूदा समय में इनकी संख्यां एक सैकड़ा से घटकर महज 25 से 30 रह गई। इन हाथ कागज उद्योग के बंद होने से हजारों लोगों की रोजी रोटी छिनने के साथ युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी बंद हो गये थे। कई बेरोजगार जनपद से पलायन कर गये। कई फैक्ट्री मालिक दूसरों के यहां काम की तलाश में भटक रहे है। बुंदेलखण्ड की शान तथा जनपद के बेरोजगारों को रोजगार देने वाला कालपी का हाथ कागज उद्योग आज के 35 साल पहले करीब एक सैकड़ा छोटे बड़े कागज उद्योगों के कारखाने लगे थे। जो उस वक्त में जिले के हर वर्ग के लोगों को रोजगार मिल जाता था। और उनकोे कमाई के लिये बाहर नहीं जाना पड़ता था।

पर एक दशक में ही यहां के कागज उद्योग दम तोड़ने लगे और उनके धीरे धीरे ताले लगना शुरु हो गये। जिससे हजारों की संख्यां में लोगों से रोजगार छिन गया। आज हालत यह है कि महज 25 से 30 हाथ कागज फैक्ट्रियां ही यहां पर रह गई है। इन फैक्ट्रियों के बंद होने के बाद रोजगार की तलाश में बड़ी संख्यां में लोगों ने दूसरे राज्यों का रूख किया। कईयों ने छोटा मोटा धंधा कर यहां पर अपना गुजारना शुरु कर दिया। इन हाथ कागज उद्योग के बंद होने का दंश आज भी जिले के युवा झेल रहे हंै। हजारों की संख्यां में यहां पर युवा बेरोजगार है और वह काम करना चाहते हैं पर साधन के अभाव में वह चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे है। और ना ही शासन प्रशासन इस ओर ध्यान दे रहा है। हाथ कागज उद्योग के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र तिवारी की माने तो इन हाथ कागज उद्योग के बंद होने की कई वजह रही। जैसे कि बाजार में कागज की सफ्लाई न होना, बिजली बिल में की जाने वाली सब्सिडी खत्म होना, जीएसटी लागू करना लगातार यह उद्योग खंडहर में तब्दील हो जाना और इनका कोई खस्ता हालत के जिम्मेदार है ।

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