2018-19 बजट >>उम्मीदें व मांग

वित्त वर्ष 2018-19 के लिए लिए आम बजट एक फरवरी 2018 को पेश किया जाएगा। 29 जनवरी से बजट सत्र की शुरुआत हो जाएगी, जो दो चरणों में चलेगा। लगातार दो साल से कड़े आर्थिक फैसलों से आहत आम आदमी और कारोबारियों को इस बार उम्मीद है कि इस बजट में कुछ राहत मिलेगी। जिंदगी कुछ आसान होगी और पटरी से उतरा कारोबार सरपट दौड़ेगा। पिछले साल एक जुलाई को देश का सबसे बड़ी कर सुधार व्यवस्था गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) लागू की गई। इस कदम ने पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था को कई मायनों में बदल दिया। खास बात ये है कि इनडायरेक्ट टैक्स के बाहर निकलने से बजट-2018 का सस्पेंस खत्म हो गया है।

बजट दो हिस्सों में होता है- पार्ट ए और पार्ट बी। पहले पार्ट में अलग-अलग सेक्टर को मिलने वाली रकम की जानकारी होती है और नई स्कीमों का ब्योरा होता है। पार्ट बी में सभी तरह के टैक्स प्रस्ताव होते हैं जिसमें डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स शामिल होते हैं। डायरेक्ट टैक्स में इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स आते हैं। वहीं इनडायरेक्ट टैक्स में (जीएसटी से पहले) सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी, वैट होता था। इनडायरेक्ट टैक्स के कारण आम जनता बजट से जुड़ी रहती थी। सभी लोगों की इस पर नजर रहती थी कि क्या सस्ता होगा क्या महंगा होगा। इसका असर अमीर, गरीब, छात्र, युवा सब पर पड़ता था। अब ऐसा नहीं होगा क्योंकि जीएसटी के कारण सामान और सेवाओं पर टैक्स की दर तय करने का काम जीएसटी काउंसिल के पास चला गया है। काउंसिल समय-समय पर बैठक कर इनमें बदलाव करती रहती है। यही नहीं, जीएसटी के कारण एक दर्जन से ज्यादा टैक्स खत्म हो गए हैं। ऐसे में वित्त मंत्री इनमें बदलाव नहीं कर पाएंगे। इस बार टैक्स को लेकर आयकर प्रावधानों के अलावा कोई सस्पेंस नहीं रहेगा।

जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला बजट है। इस बजट में कारोबारियों को सरकार से खास उम्मीदें हैं। टैक्स स्लैब ज्यादा होने के चलते टैक्स चोरी फिर से बढ़ी है। इसलिए सरकार को इस पर ध्यान देना होगा।-अजीत सिंह भाटियामहामंत्री, गड़रियन पुरवा ऑटो मोबाइल एसोसिएशन

 

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